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Dam and Baradari Khandela - घूमने की जगह और इतिहास, Dam and Baradari Khandela - Places to Visit and History

खंडेला के निकट सलेदीपुरा नामक जगह का बड़ा ऐतिहासिक महत्व है. यहाँ पर कई ऐतिहासिक स्थल है जो काफी दर्शनीय हैं. इन्ही में से एक है यहाँ का बाँध और इसके किनारे पर बनी बारादरी.

यह बाँध सलेदीपुरा से उदयपुरवाटी की तरफ जाने वाले रास्ते पर स्थित है. अब इस बाँध में पानी ना के बराबर है. बारिश के मौसम में इसमें कुछ पानी आ जाता है.

Saledipura Dam History

ऐसा लगता है कि प्राचीन समय में यहाँ पर या तो कोई नदी बहती होगी या फिर यहाँ कोई बहुत बड़ा तालाब रहा होगा जिसके पानी को बहने से रोकने के लिए इस बाँध का निर्माण किया गया होगा.

Saledipura Baradari construction and history

बाँध की दीवार के पास एक बारादरी बनी हुई है. यह बारादरी तीन मंजिला ईमारत के रूप में है. सबसे ऊपर की मंजिल पर बारादरी बनी हुई है. इस बारादरी के चारों तरफ खुला गलियारा एवं अन्दर एक छोटा हॉल बना हुआ है जिसमे चारों तरफ दरवाजे बने हुए हैं.

बीच की मंजिल पर चारों तरफ गलियारा बना हुआ है. चारों दीवारों में खिड़की बनी हुई है जिससे नीचे की मंजिल को देखा जा सकता है. सबसे नीचे की मजिल संभवतः रहने के लिए काम में ली जाती होगी.

सबसे ऊपर की मंजिल में अन्दर हॉल की एक दीवार पर शिलालेख लगा हुआ है. इस शिलालेख में दोहे के रूप में कुछ जानकारी दी गई है. दी गई जानकारी में मोकल, रायमल, गिरधर, द्वारिकादास, जसवंत, कुंवर जयसिंह आदि के नाम स्पष्ट रूप से पढने में आते हैं.

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बारादरी से इस बाँध का भव्य नजारा दिखाई देता है. हम कल्पना कर सकते हैं कि जब ये बाँध पूरा भरा रहता होगा तब यहाँ का प्राकृतिक सौन्दर्य अपने चरम पर रहता होगा. बाँध का भराव क्षेत्र काफी बड़े क्षेत्र में फैला हुआ है.

बारादरी के शिलालेख में इस बाँध के सम्बन्ध में भी जानकारी दी हुई है. जहाँ तक ये शिलालेख समझ में आता है उसके अनुसार शायद यह बंधा विक्रम संवत 1932 (1875 ईस्वी) में बनाया गया था. बाद में सज्जन सिंह ने विक्रम संवत 1968 को फागुन के महीने में इसका जीर्णोद्धार करवाया था.

यह बड़ी ऐतिहासिक और दर्शनीय जगह है लेकिन अब पूरी तरह से उपेक्षित है. देखने में यह जगह साधारण ही प्रतीत होती है लेकिन जब इस शिलालेख को देखते हैं तब इस स्थान का महत्व समझ में आता है.

अगर आप प्राचीन धरोहरों को करीब से देखकर उन्हें जानने के इच्छुक हैं तो इस धरोहर को अवश्य देखना चाहिए.

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Written By

ramesh sharma

Ramesh Sharma (M Pharm, MSc (Computer Science), MA (History), PGDCA, CHMS)

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