meri kamiyan batane wale poetry

मेरी कमियाँ बताने वाले - हिंदी कविता, Meri Kamiyan Batane Wale - Hindi Kavita

मेरी कमियाँ बताने वाले, मेरी खूबियाँ भी बताते तो कोई बात होती
गैरों को बताना ठीक नहीं था, मुझको बताते तो कोई बात होती

अपना दर्द सुनाने वाले, मेरा भी सुनाते तो कोई बात होती
सिक्के का एक पहलू ही दिखाया, दूसरा भी दिखाते तो कोई बात होती

घरेलू बातें दुनिया में बताना गलत है, इस बात को निभाते तो कोई बात होती
दूसरों पर मनमाफिक तोहमत लगाकर, इतना ना गिराते तो कोई बात होती

अपने माता पिता जैसी चिंता, सभी बुजुर्गों के लिए जताते तो कोई बात होती
दूसरे बुजुर्ग भी माँ बाप जैसे हो सकते हैं, अहसास जो कराते तो कोई बात होती

बहू भी बेटी बन सकती है, कभी बनके दिखाते तो कोई बात होती
सभी के साथ अपना रिश्ता, आत्मिक सा बनाते तो कोई बात होती

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हैसियत अपने घर की बहुओं की, निष्पक्षता से तौल पाते तो कोई बात होती
बहुएँ तो सिर्फ काम करने के लिए होती है, यह सोच बदल पाते तो कोई बात होती

अपने हिसाब से अपनी जिंदगी जीना गलत नहीं है, कहके दिखाते तो कोई बात होती
अपने लिए इसे जायज और दूसरों के लिए नाजायज, ना ठहराते तो कोई बात होती

उकसाने के बजाये बुजुर्गों को भी, गलती का अहसास कराते तो कोई बात होती
तुम रिश्तों में सेतु बन सकते थे, कभी बनके दिखाते तो कोई बात होती

Meri Kamiyan Batane Wale Poem in English

meri kamiya batane wale, meri khoobiya bhi batate to koi baat hoti
gairon ko batana theek nahi tha, mujhko batate to koi baat hoti

apna dard sunane wale, mera bhi sunate to koi baat hoti
sikke ka ek pahlu hi dikhaya, doosra bhi dikhate to koi baat hoti

gharelu baaten duniya me batana galat hai, is baat ko nibhate to koi baat hoti
doosron par manmafik tohmat lagakar, itna na girate to koi baat hoti

apne maata pita jaisi chinta, sabhi bujurgon ke liye jatate to koi baat hoti
doosre bujurg bhi maan baap jaise ho sakte hain, ahsaas jo karate to koi baat hoti

bahu bhi beti ban sakti hai, kabhi banke dikhate to koi baat hoti
sabhi ke saath apna rishta, aatmik sa banate to koi baat hoti

haisiyat apne ghar ki bahuon ki, nishpakshta se taul pate to koi baat hoti
bahuyen to sirf kam karne ke liye hoti hain, yah soch badal paate to koi baat hoti

apne hisab se apni jindagi jeena galat nahi hai, kahke dikhate to koi baat hoti
apne liye ise jaayaj or doosron ke liye naajayaj, naa thahrate to koi baat hoti

uksane ke bajaye bujurgon ko bhi, galti ka ahsaas karate to koi baat hoti
tum rishton me setu ban sakte the, kabhi banke dikhate to koi baat hoti

Written By

ramesh sharma

Ramesh Sharma (M Pharm, MSc (Computer Science), MA (History), PGDCA, CHMS)

Disclaimer

कविता में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं एवं कोई भी सूचना, तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार Khatu.org के नहीं हैं. कविता में दी गई किसी भी सूचना की सटीकता, संपूर्णता, व्यावहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति Khatu.org उत्तरदायी नहीं है.

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