Maharana Pratap Poem

मरना सबको है, हथियार डालकर ना मरो - हिंदी कविता, Marna Sabkoo Hai Hathiyar Daalkar Naa Maro - Hindi Kavita

जब जीवन में निराशा और नाउम्मीदी बढ़ जाए
जब चारों तरफ अंधकार दिखाई देने लग जाए
जब हौसला पूरी तरह से पस्त होने लग जाए
जब उम्मीद का सूरज अस्त होने लग जाए

तो एक बार जरूर गौर कर लेना
उन महाराणा प्रताप के जीवन पर
जिन्होंने अकबर की दासता के सुखों को त्यागकर
स्वाभिमान और स्वतंत्रता के दुखों को अपनाकर
वन-वन भटक कर, गुफाओं में रहकर
भोजन की जगह घास की रोटी खाकर
कभी अपने लक्ष्य से मुँह नहीं मोड़ा

प्रताप का पूरा जीवन भागदौड़ और संघर्षों में बीता है
एकलिंग, इनके कृष्ण और स्वाभिमान इनकी गीता है
जब-जब इनके बीवी बच्चों ने घास की रोटी खाई है
तब-तब ये भी टूटे हैं, इनकी भी अंतरात्मा घबराई है
करुण दृश्य देखने के बाद, ये और मजबूती से खड़े हुए
सब समस्याओं के बाद भी, रहे अपने लक्ष्य पर अड़े हुए

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अब जरा गौर करना अपने जीवन पर
तौलना इसे महाराणा प्रताप के जीवन के साथ
फिर खुद से पूँछना कि
क्या तुमने किसी राजवंश में जन्म लिया है?
क्या तुम किसी रियासत के राजा रहे हो?
क्या तुम्हे अपना राज्य गवाना पड़ा है?
क्या तुम्हे अपने परिवार के साथ जंगल में भटकना पड़ा है?
क्या तुमने अपने परिवार के साथ गुफाओं में रात बिताई है?
क्या तुमने अपने बीवी, बच्चों को घास की रोटी खिलाई है?

महाराणा का जीवन, त्याग और बलिदान से ओत प्रोत है
जिसमे हल्दी घाटी का मैदान, अनंत ऊर्जा का स्त्रोत है
महाराणा का संघर्ष और लक्ष्य, दोनों ही बहुत बड़े थे
वो अपने लिए नहीं, अपनी मातृभूमि के लिए लड़े थे
तुम अपने जीवन के लिए भी लड़ नही पा रहे हो
असफलताओं का दोष किसी ओर को दिए जा रहे हो

क्या तुम्हारा संघर्ष महाराणा के संघर्ष से भी बड़ा है?
क्या तुमसे लड़ने के लिए कोई बादशाह अकबर खड़ा है?
अगर नही, तो फिर आत्मविश्वास में कमी क्यों हैं?
अगर नही, तो फिर आखों में अक्सर नमीं क्यों है?
महाराणा से प्रेरणा लेकर, सब कुछ फिर से शुरू करो
संघर्ष का नाम ही जीवन है, संघर्षों से ना डरो

सही है, सफलता में हस्त रेखाओं का भी योगदान होता है
लेकिन, वो लोग भी तो सफल होते हैं, जिनके हाथ नहीं होते
कहते हैं कि निरंतर कर्म करने से भाग्य बदल जाता है
चींटी का अथक परिश्रम, इसी बात को दिखलाता है
तुम कुछ कर सकते हो, अपनी मेहनत से इसे साबित करो
मरना एक दिन सबको है, हथियार डालकर तो ना मरो

Written By

ramesh sharma

Ramesh Sharma (M Pharm, MSc (Computer Science), MA (History), PGDCA, CHMS)

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कविता में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं एवं कोई भी सूचना, तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार Khatu.org के नहीं हैं. कविता में दी गई किसी भी सूचना की सटीकता, संपूर्णता, व्यावहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति Khatu.org उत्तरदायी नहीं है.

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