kuchh log sapne bade sanjote hai poetry

कुछ लोग सपने बड़े संजोते है - हिंदी कविता, Kuchh Log Sapne Bade Sanjote Hai - Hindi Kavita

कुछ लोग सपने बड़े संजोते है
फिर मैयत उनकी ढोते हैं
सबके व्यंगबाण सहते हैं
लेकिन चुप ही रहते हैं

सबको मनमौजी दिखते हैं
प्रेम की कौड़ी में बिकते हैं
सनकी भी समझे जाते हैं
दिल ही दिल में सब पी जाते हैं

गम को गले लगाते हैं
तनहाई मे आँसू बहाते हैं
ईश्वर से ये कहते हैं
हम धरती पर क्यों रहते हैं

क्यों सब हमको ठुकराते हैं
क्यों गले नहीं लगाते हैं
क्यों उपेक्षित से रह जाते हैं
क्यों प्यार नहीं हम पाते हैं

सपने दिन रात सताते हैं
अकेलेपन को गले लगाते हैं
जिससे भी बतियाते हैं
वो समझ हमें नहीं पाते हैं

Also Read भारत की शान, हमारा तिरंगा - हिंदी कविता

कहने को सब का साथ है
सर पे सभी का हाथ है
फिर ऐसी क्या बात है
जो हर रात अमावस की रात है

जिस काम में भी हाथ डालते हैं
उस काम का जनाजा निकालते हैं
मेहनत पूरी करते हैं
पर केवल हाथ मलते हैं

असफल होना कर्मो का फल लगता है
शायद, इसलिए कुछ भी नहीं फलता है
मन घुट घुट कर, तिल तिल कर, मरता है
पर जाने किस उम्मीद में जीवन चलता है

अब जीवन का वो मुकाम आ गया
जहाँ लोगों के जीवन में खुशी है
पर हम जैसों के जीवन में
आज भी छाई खामोशी है

बढ़ती खामोशी धीरे धीरे नकारात्मकता लाती है
अब जीवन किस काम का, यही बात बतलाती है
त्याग दे ये असफल जीवन, छोड़ दे सभी सुनहरे सपने
बारम्बार आँखों के सामने घूम जाते हैं कुछ चेहरे अपने

इन चेहरों की अश्रुपूरित कातर नजरे डोलती है
टकटकी लगाकर डबडबाई आँखे ये बोलती है
तुम्हारे बाद हमारा क्या होगा, हम कैसे जी पाएँगे
दुनिया बड़ी बेरहम है, क्या हम सुखी रह पाएँगे

ये चेहरे ही जीवन बचाते हैं
मरे हुए आत्मविश्वास को फिर से जगाते हैं
उम्मीद की सुनहरी किरण फिर से दिखाते हैं
नाउम्मीदी के अंधकार में जीवन का लक्ष्य बताते है

जीवन पर हमारा हक नहीं, यह ईश्वर की नैमत है
इसका चलते रहना ही खुदा की इबादत है
जिस दिन इस इबादत का अंत अपने आप होगा
केवल उस दिन ही आत्मा का परमात्मा से मिलाप होगा

सफलता, असफलता और भाग्य, उस ईश्वर के हाथों में है
बिना फल के कर्म करने का ज्ञान, हमेशा उसकी बातों में है
आज से जीवन को ईश्वर की अमानत समझकर जीना है
दुख रूपी जहर को, नीलकंठ बनकर खुशी खुशी पीना है

जीवन अनमोल है यह अब हमने ठान लिया
नियति को स्वीकार कर इसको अपना मान लिया
चाहे कुछ भी हो जाए फिर से नई शुरुआत करनी है
वह सुबह कभी तो आएगी, गम की रात भी ढलनी है

Kuchh Log Sapne Bade Sanjote Hai Poem in English

Written By

ramesh sharma

Ramesh Sharma (M Pharm, MSc (Computer Science), MA (History), PGDCA, CHMS)

Disclaimer

कविता में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं एवं कोई भी सूचना, तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार Khatu.org के नहीं हैं. कविता में दी गई किसी भी सूचना की सटीकता, संपूर्णता, व्यावहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति Khatu.org उत्तरदायी नहीं है.

Connect With Us on YouTube

Travel Guide
Health Show