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Prescription और उसके Symbols को कैसे समझें?, How to understand Prescription and its Abbreviations?

बीमार होने पर आपने डॉक्टर द्वारा लिखे गए प्रिस्क्रिप्शन को तो देखा ही होगा, इसमें दवाइयों के नाम के साथ-साथ उन्हें इस्तेमाल करने के संकेतों के रूप में निर्देश लिखे होते हैं.

अमूमन एक आम पेशेंट को दवाइयाँ समझ में नहीं आती लेकिन ये संकेत इन दवाओं के उपयोग के सम्बन्ध में होते हैं इसलिए हम सभी को कुछ सामान्य संकेतों की जानकारी होना बहुत जरूरी है.

What is prescription?

आज हम समझेंगे कि प्रिस्क्रिप्शन क्या होता है, इसमें दवाओं के उपयोग के लिए कौन-कौन से संकेत लिखे जाते हैं और इनका क्या मतलब होता है. हम सभी बीमार होते रहते हैं जिस वजह से रोजमर्रा की जिन्दगी में हमारा वास्ता प्रिस्क्रिप्शन से पड़ता रहता है.

प्रिस्क्रिप्शन का सामान्य मतलब चिकित्सक द्वारा मरीज को लिखी गई वह पर्ची जिस पर रोग और उसको ठीक करने के लिए दी जाने वाली दवाइयों की जानकारी होती है.

सामान्यतः इसे ‘डॉक्टर की पर्ची’ या फिर ‘दवाई की पर्ची’ कहा जाता है परन्तु इसका अंग्रेजी में वैज्ञानिक नाम प्रिस्क्रिप्शन होता है.

प्रिस्क्रिप्शन का डॉक्टर, फार्मासिस्ट तथा मरीज तीनों के लिए बहुत महत्व होता है. जैसा कि हमने पहले बात की है कि सभी को प्रिस्क्रिप्शन को पूरी तरह से समझना आना चाहिए.

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प्रिस्क्रिप्शन एक रजिस्टर्ड मेडिकल प्रेक्टिशनर या फिर किसी अन्य वैधानिक लाइसेंस प्राप्त प्रेक्टिशनर जैसे की डेंटिस्ट, वेटेरिनारियन, आदि द्वारा फार्मासिस्ट को दिया गया वह लिखित आदेश है जिसकी मदद से फार्मासिस्ट मरीज के लिए दवा को कंपाउंड और डिस्पेंस करता है.

फार्मासिस्ट इस प्रिस्क्रिप्शन की मदद से मरीज को उचित दवा का वितरण करता है. प्रिस्क्रिप्शन में फार्मासिस्ट और मरीज दोनों के लिए ही निर्देश होते हैं जिसमे फार्मासिस्ट के लिए दवा देने सम्बन्धी तथा मरीज के लिए दवा लेने सम्बन्धी निर्देश होते हैं.

इस प्रकार प्रिस्क्रिप्शन एक ऐसा माध्यम है जिसके द्वारा डॉक्टर और फार्मासिस्ट के संयुक्त प्रयासों से मरीज का ईलाज किया जाता है.

What are the various parts of prescription?

सबसे पहले हमें प्रिस्क्रिप्शन के विभिन्न भागों की जानकारी होना आवश्यक है. एक प्रिस्क्रिप्शन विभिन्न भागों में विभाजित होता है जो निम्न प्रकार हैं:

1. दिनांक (Date)
2. मरीज का नाम, आयु, लिंग और पता (Name, Age, Sex and Address of patient)
3. सुपर्स्क्रिप्शन (Superscription)
4. इन्स्क्रिप्शन (Inscription)
5. सब्सक्रिप्शन (Subscription)
6. सिग्नेचरा (Signatura)
7. रिन्यूअल इंस्ट्रक्शन्स (Renewal Instructions)
8. डॉक्टर के हस्ताक्षर, पता और रजिस्ट्रेशन नंबर (Signature and Registration Number of Doctor)

अब हम उपरोक्त सभी का संक्षेप में अध्ययन करते है.

दिनांक उस दिन को इंगित करती है जिस दिन डॉक्टर ने मरीज को प्रिस्क्रिप्शन लिखा है अर्थात यह उपचार की शुरुआत का दिन होता है. मरीज को उसी दिन से दवा लेना शुरू कर देना चाहिए.

मरीज का नाम, आयु, लिंग और पते से मरीज के बारे में पूरी जानकारी मिल जाती है. आयु और लिंग मरीज को दी जाने वाली दवाओं की डोज का निर्धारण करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.

सामान्यतः बच्चों और महिलाओं को वयस्क पुरुषों के मुकाबले में कम मात्रा में दवा की आवश्यकता होती है अतः इन्हें दी जाने वाली दवा की डोज कम होती है.

सुपर्स्क्रिप्शन को एक चिन्ह ‘Rx’ से प्रदर्शित किया जाता है एवं इसको प्रिस्क्रिप्शन लिखने से पहले लिखा जाता है. यह एक लैटिन शब्द ‘रेसिपी’ का संक्षिप्त रूप है जिसका अंग्रेजी में मतलब ‘यू टेक’ होता है.

इस शब्द की उत्पत्ति जुपिटर के चिन्ह से हुई जिसे ‘गॉड ऑफ़ हीलिंग’ कहा जाता था. इस चिन्ह का प्रयोग भगवान से मरीज के स्वस्थ होने की प्रार्थना के लिए किया जाता था.

इन्स्क्रिप्शन प्रिस्क्रिप्शन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होता है जिसमे दवाइयों के नाम तथा उनकी निर्धारित मात्रा से सम्बंधित दिशा निर्देश होते हैं.

दवाइयों के नाम सामान्यतः अंग्रेजी में होते है परन्तु उनकों लेने के लिए संक्षिप्त संकेत लैटिन भाषा में होते हैं. अतः हमें इन मुख्य-मुख्य लैटिन संकेतों का ज्ञान होना आवश्यक है.

सब्सक्रिप्शन फार्मासिस्ट को दिए गए दिशा निर्देश होते हैं जिनकी मदद से वह मरीज को दवा की खुराक डिस्पेंस करता है.

प्रिस्क्रिप्शन का यह भाग पहले होता था. आधुनिक प्रिस्क्रिप्शन में यह भाग नहीं होता है क्योंकि अब सभी दवाइयाँ रेडीमेड बनी हुई मिलती है तथा अब फार्मासिस्ट द्वारा प्रिस्क्रिप्शन को कंपाउंड और डिस्पेंस नहीं किया जाता है.

सिग्नेचरा मरीज को डॉक्टर द्वारा दवा लेने सम्बन्धी निर्देश होते हैं तथा अमूमन इसे ‘Sig’ से प्रदर्शित किया जाता है तथा फार्मासिस्ट द्वारा इन निर्देशों को दवा के लेबल पर दर्शाया जाता है. आजकल दवाइयाँ रेडीमेड आने से डॉक्टर इन्स्क्रिप्शन वाले हिस्से में ही यह दिशा निर्देश लिख देते हैं.

रिन्यूअल इंस्ट्रक्शन्स में डॉक्टर यह लिखता है कि मरीज को पुनः वापस दिखाना है या नहीं और अगर दिखाना है तो कितने दिनों के पश्चात दिखाना है. डॉक्टर के हस्ताक्षर, पता और रजिस्ट्रेशन नंबर से हमें डॉक्टर के सम्बन्ध में पूरी जानकारी मिल जाती है.

सरकारी निर्देशों के अनुसार डॉक्टर्स को प्रिस्क्रिप्शन कैपिटल लेटर्स में लिखना चाहिए तथा दवा के ब्रांड नाम न लिखकर उनके जेनेरिक नाम यानि कि एक्टिव इन्ग्रेडीएंट्स के नाम लिखने चाहिए जैसे क्रोसिन न लिखकर पेरासिटामोल लिखना चाहिए.

सामान्यतः सभी प्रिस्क्रिप्शन अंग्रेजी भाषा में ही लिखे जाते हैं परन्तु इसमें लैटिन भाषा के शब्दों और संक्षिप्त नामों का बहुतायत से प्रयोग किया जाता है.

Abbreviations or symbols in prescription

हमें प्रिस्क्रिप्शन में डॉक्टर द्वारा दवा के उपयोग के समबन्ध में लिखे गए मुख्य-मुख्य लैटिन शब्दों और संक्षिप्त संकेतों का ज्ञान होना आवश्यक है. ये संकेत और इनका मतलब इस प्रकार है:

1. Sem in Die – दिन में एक बार
2. BID – दिन में दो बार
3. TID – दिन में तीन बार
4. QID – दिन में चार बार
5. OM – प्रत्येक सुबह
6. ON – प्रत्येक रात
7. M – सुबह
8. N – रात
9. Q – प्रत्येक
10. OH – प्रत्येक घंटे
11. OQH – प्रत्येक चार घंटे
12. AC – भोजन से पहले
13. PC – भोजन के पश्चात
14. HS – रात को सोते समय
15. SOS – जब आवश्यकता हो या जब जरुरी हो
16. PO – मुँह से
17. Stat – तुरंत
18. AD – दाँया कान
19. C – साथ में
20. QD (quaque die) – प्रत्येक दिन
21. OD – दाँयी आँख
22. AQ – पानी
23. Cibos – भोजन
24. H – घंटा
25. OMN – प्रत्येक
26. QS – जितना पर्याप्त हो (पर्याप्त मात्रा में)
27. Rx – आप लीजिए
28. SS – आधा
29. Caps – कैप्सूल
30. Inj – इंजेक्शन
31. Tab – टेबलेट
32. PRN – जब आवश्यकता हो
33. IM – इंट्रामस्कुलर
34. IV – इंट्रावेनस
35. SC – सबक्यूटेनियस
36. PO - मुँह से

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Written By

ramesh sharma

Ramesh Sharma (M Pharm, MSc (Computer Science), MA (History), PGDCA, CHMS)

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