improve eyesight without drugs

बिना किसी Medicine के Eyesight कैसे तेज करें?, How to improve eyesight without Medicines?

आधुनिक युग में इंसान भागदौड़ भरी जिंदगी जी रहा है. हर इंसान एक अजीब सी हड़बड़ी में है. किसी के पास भी अपने तय कार्यक्रमों के अतिरिक्त समय नहीं है. हर इंसान पता नहीं किस तरफ भाग रहा है.

टेक्नोलॉजी ने दुनिया के कोने-कोने तक अपनी पहुँच बनाकर इंसान की भागदौड़ को और आसान बना दिया है या यूँ कहें कि भागदौड़ करने के लिए प्रेरित कर दिया है.

इस भागदौड़ के लिए कंप्यूटर और मोबाइल के साथ-साथ अन्य गैजेट्स ने भी उपयोगी भूमिका निभाकर अपने आप को इंसानी जीवन का एक अभिन्न अंग बना लिया है.

आज हालत यह हो गई है कि इंसान का जीवन कंप्यूटर, मोबाइल तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स के बिना कल्पनाविहीन है. कंप्यूटर, मोबाइल्स आदि गैजेट्स की वजह से इंसानी आँखों पर बहुत नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है जिसे इंसान शुरू से ही हलके में रहा है.

इंसान के पास अपने शरीर के लिए और खासकर आँखों की देखभाल के लिए बिलकुल समय नहीं है. नतीजन बड़ों के साथ-साथ बच्चों की आँखों पर भी ऐनक का बोझ बढ़ गया है.

कंप्यूटर तथा स्मार्टफोन के साथ-साथ टीवी ने भी आँखों ज्योति कम करने में अत्यंत सहायक भूमिका निभाई है.

लम्बे समय तक कंप्यूटर तथा मोबाइल की स्क्रीन को एकटक देखने, दिनभर टीवी देखने की वजह से हमारी आँखों की मांसपेशियों की लचक कम हो जाती है परिणामस्वरूप आँखों में थकान की शिकायत के साथ-साथ नेत्रज्योति भी कम पड़ जाती है.

शरीर के लिए तो लोग फिर भी फिटनेस सेंटर या जिम में चले जाते है परन्तु आँखों की देखभाल में या तो लापरवाही बरतते हैं या फिर इन्हें शायद इस बात का पता ही नहीं होता है कि आँखों के लिए भी कसरतें होती है जिनकी वजह से आँखों को स्वस्थ रखा जा सकता है.

Exercises that can improve eyesight

आज मैं आपको यहाँ पर कुछ ऐसी आसान कसरतों के सम्बन्ध में बताऊँगा जिनको नियमित रूप से करने पर नेत्रज्योति बढ़ने के साथ-साथ आँखे हमेशा सेहतमंद रहेंगी.

स्ट्रेचिंग – इस कसरत से आँखों की मांसपेशियाँ मजबूत होती है जिससे इनमे लचीलापन बढ़ता है. स्ट्रेचिंग करने के लिए सबसे पहले किसी दीवार के सामने खड़े हो जाएँ और उस पर आँखों को हिलाकर कुछ लिखने की कल्पना करें.

अभ्यास करने के लिए सबसे सबसे अच्छा अक्षर गणित का 8 अंक है. अपनी आँखों की पुतलियों को आठ बनाने के लिए जहाँ से अंक का इंटर सेक्शन होता है वहीँ से ऊपर की तरफ घडी की दिशा (clockwise) में घुमाएँ.

आप पाएँगे कि जब हम इसी क्रम में इंटर सेक्शन के नीचे बढ़ते हैं तब आँखों को घुमाने की दिशा घडी की विपरीत दिशा (anticlockwise) में हो जाती है.

इस प्रकार 8 अंक का पूरा चक्कर लगाने पर हमारी आँखे वामावर्त एवं दक्षिणावर्त दोनों दिशा में घूमती है. एक बार में लगभग पाँच बार यह क्रिया करें तथा बीच बीच में पलकों को झपका लें.

पल्मिंग (हथेली क्रिया) – यह क्रिया करने के लिए वज्रासन या फिर सामान्य रूप से आलथी पालथी लगाकर बैठ जाएँ. अपनी दोनों हथेलियों को तेजी से आपस में इतना रगड़े कि ये घर्षण के कारण पर्याप्त रूप में गर्म हो जाए.

अब अपनी दोनों आँखे बंद कर अपनी दोनों हथेलियों से आँखों को ढक लें. कुछ देर तक दृष्टि स्थिर रख एकाग्रता बनाये रखे. यह क्रिया भी एक बार में लगभग पाँच बार करें.

ब्लिंकिंग – इस क्रिया को करने के लिए सीधे बैठकर अपनी पलकों को लगभग 15 बार तेजी से झपकाएं. बीच-बीच में आराम देते हुए यह क्रिया भी लगभग पाँच बार दोहराएँ.

जूम इन जूम आउट – इस कसरत से आँखों के फोकस करने की क्षमता में इजाफा होता है तथा आँखों के लेंस के साथ-साथ मांसपेशियों की भी अच्छी कसरत हो जाती है.

यह कसरत निकट दृष्टि दोष को दूर करने में सहायक है अर्थात इस क्रिया को करने से दूर की नजर तेज होती है. इस क्रिया को करने के लिए आरामदायक मुद्रा में बैठ जाएँ.

अपने हाथ चेहरे के सामने फैलाकर अंगूठे को स्थिर रख कर उस पर फोकस करें. अब अंगूठे को धीरे-धीरे अपनी आँखों के नजदीक लाये और फिर दूर ले जाएँ.

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ध्यान रहे कि अंगूठे पर पूरा फोकस बना रहना चाहिए. एक बार में लगभग 10 बार यह क्रिया करें. अब पुनः अपने अंगूठे को अपनी नाक के पास रखे.

अपने अंगूठे पर पूरा फोकस कर उसे देखे फिर अंगूठे पर से नजर हटाकर उसी सीध में कोई पास की वस्तु को देखे, पुनः अंगूठे पर फोकस करें तथा फिर उसी सीध में किसी दूर की वस्तु पर फोकस करें. यह क्रिया लगभग दस बार करें.

मसाज – आँखों की मालिश से आँखों को बहुत आराम मिलता है. यह आँखों में होने वाली मांसपेशियों के रिलैक्स होने की वजह से होता है. आँखों की मालिश से पहले अपनी दोनों आँखों को बंद कर ले.

अब अपनी दोनों हथेलियों को दोनों आँखों पर रख हल्का सा दबाव डाल कर धीरे-धीरे गोल-गोल घुमाएँ. यह क्रिया लगभग दस बार करें.

वाशिंग तथा रेस्ट – दिन में कम से कम पाँच छः बार ठन्डे पानी से आँखों को धोना चाहिए. त्रिफला के पानी से भी आँखों को धोया जा सकता है.

ज्यादा समय तक कंप्यूटर, मोबाइल या टीवी की स्क्रीन को लगातार नहीं देखे, बीच-बीच में आँखों को उचित रूप से आराम देते रहें. देर रात तक नहीं जागे एवं पर्याप्त रूप से गहरी नींद लें.

सर्वांगासन – इस आसन को करने से ना सिर्फ आँख बल्कि शरीर के लगभग सभी अंगों की कसरत एक साथ हो जाती है इसलिए इस आसन को योग की दुनिया में सभी आसनों की माँ के नाम से जाना जाता है.

इस आसन को करने के लिए जमीन पर पीठ के बल सीधे लेट जाएँ तथा हाथों को कमर के साथ सीधा रखे. अब अपने दोनों पैरों को 90 डिग्री तक उठा ले तथा अपने दोनों हाथों से अपनी कमर के नीचे वाले हिस्से को सहारा दें.

लगभग 30 सेकंड तक इस मुद्रा को बनाए रखे तथा धीरे-धीरे पूर्ववर्ती स्थिति में वापस आ जाएँ. इस तरह इस आसन को लगभग पाँच बार दोहराएँ.

त्राटक आसन – यह आसन त्राटक ध्यान विधि भी कहलाती है. इस आसन से नेत्रज्योति के साथ-साथ एकाग्रता भी बढती है.

इस आसन को अँधेरे में किया जाता है इसलिए इस आसन को या तो रात में या फिर किसी अँधेरी जगह पर किया जाता है. इसे करने के लिए अँधेरे कमरे में एक मोमबत्ती जलाकर उसके सामने प्राणायाम की मुद्रा में बैठ जाएँ.

अब बिना पलके झपकाए मोमबत्ती की लौ को देखते रहें. कुछ समय पश्चात आँखे बंद कर ओम प्राणायाम द्वारा ॐ का उच्चारण करें तथा आँखें खोल लें. इस प्रक्रिया से आँखों में आँसू भी आ सकते है.

यह प्रक्रिया लगभग तीन बार दोहराएँ. तीसरी बार में पामिंग द्वारा अपनी हथेलियाँ गर्म करें एवं हथेलियों को आँखों पर रख नाक की सीध में दृष्टि रखते हुए धीरे-धीरे आँखें खोले. एक सप्ताह में यह आसन कम से कम तीन बार दोहराएँ.

अनुलोम विलोम प्राणायाम - इस आसन को 'नाड़ी शोधक प्राणायाम' भी कहा जाता है तथा इसे करने से फेफड़ों की मजबूती के साथ-साथ रक्त परिसंचरण तंत्र भी मजबूत होता है जिसकी वजह से आँखों को भी लाभ होता है. इस प्रणायाम को प्रातःकाल शुद्ध हवा में करना चाहिए.

इस आसन को करने के लिए आप पद्मासन, सिद्धासन, स्वस्तिकासन अथवा सुखासन में बैठ कर अपने दाएँ हाथ के अंगूठे से अपने नाक के दाहिने छिद्र को बंद कर ले और नाक के बाएँ छिद्र से साँस अन्दर खींचे.

अब नाक के बाएँ छिद्र को अंगूठे के बगल वाली दो अंगुलियों से बंद कर दें तथा नाक के दाएँ छिद्र पर से अंगूठे को हटा कर साँस को बाहर छोड़े. अब दाएँ छिद्र से साँस अन्दर लें तथा फिर अंगूठे से दाएँ छिद्र को बंद करते हुए बाएँ छिद्र से साँस छोड़े. इस क्रिया का धीरे-धीरे अभ्यास कर समय बढ़ाएं.

शवासन - यह आसन सभी आसनों के अंत में किया जाता है. इस आसन को करने के लिए सीधा लेट कर शरीर के सभी अंगों को ढीला छोड़ दें और कुछ देर इसी स्थिति में लेते रहें. इस आसन को नियमित रूप से करने से आँखों को आराम मिलने के साथ-साथ नेत्रज्योति भी बढती है.

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Written By

ramesh sharma

Ramesh Sharma (M Pharm, MSc (Computer Science), MA (History), PGDCA, CHMS)

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