hyperthymesia

क्या तेज Memory भी एक श्राप हो सकती है?, Can sharp memory be a curse?

हम में से बहुत से लोग वीक मेमोरी यानि कमजोर याददाश्त की वजह से परेशान रहते हैं. बढती उम्र के साथ याददाश्त में कमी आने लगती है शायद इसी वजह से हम लोग अपनी याददाश्त को बढाने पर काफी जोर देते हैं.

युवाओं में विशेषकर स्टूडेंट्स में याददाश्त बढ़ाने के तौर तरीकों पर विशेष ध्यान दिया जाता है ताकि वे अधिक से अधिक मार्क्स के साथ अपनी स्टडीज पूरी कर पायें.

इसके लिए कई प्रकार के फ़ूड सप्प्लीमेंट्स इस्तेमाल किये जाने लगे हैं. ब्रेन पॉवर बढाने के लिए मेमोरी इम्प्रूविंग ट्रिक्स की कोचिंग क्लासेज भी ज्वाइन करवाई जा रही हैं.

इंसान के लिए मेमोरी बहुत जरूरी है लेकिन क्या आपने कभी ये सोचा है कि यदि किसी की मेमोरी इतनी अधिक बढ़ जाए कि उसे रोजाना की प्रत्येक घटना हुबहू याद रहने लग जाए, तब उसके जीवन पर क्या फर्क पड़ेगा.

आपमें से बहुत से लोग ऐसा सोच रहे होंगे कि अगर हमारी मेमोरी इतनी अधिक बढ़ जाए तो हम सब कुछ बड़ी आसानी से याद रख पाएँगे और यह हमारे लिए काफी यूज़फुल होगा.

आपका सोचना सरासर गलत है. यह किस प्रकार गलत है इसे मैं आपको अखबार में आई एक न्यूज़ के जरिये बताना चाहता हूँ. इस न्यूज के अनुसार ऑस्ट्रेलिया की 31 वर्ष की रेबेका को जनवरी 2004 के बाद से अब तक हर दिन की घटनाएँ जुबानी याद हैं.

सबसे ख़ास बात यह है कि इन घटनाओं में उसे वो घटनाएँ भी याद है जो हममे से बहुत से लोग एक-दो दिन में ही भूल जाते हैं जैसे कल सुबह क्या खाया था या कल कौनसी ड्रेस पहनी थी, आदि.

लेकिन रेबेका को जनवरी 2004 के बाद के हर दिन का घटनाक्रम इतनी अधिक बारीकी से याद है कि वह यह भी बता देती है कि उसने जनवरी 2004 के बाद से रोजाना क्या-क्या खाया, क्या-क्या पहना और वो कहाँ-कहाँ गई.

वो कहती है कि वह जब भी किसी घटना को याद करती है तो उसे पूरे दिन कि दिनचर्या याद आ जाती है. पिछले वर्षों का एक-एक दिन आँखों के सामने किसी फिल्म की तरह रिवाइंड होने जैसा लगता है.

लोगों को लगता है कि इतनी तेज याददाश्त होना रेबेका के लिए एक गिफ्ट के समान है लेकिन रेबेका इसे एक श्राप की तरह मानती है. इस तेज याददाश्त की वजह से उसके जीवन में भूलने जैसा कुछ नहीं रह गया है.

Harmful effects of excessive sharp memory

इस ना भूलने की वजह से उसे उन घटनाओं से आज भी तकलीफ होती है जो दस पंद्रह वर्ष पहले घट चुकी थी. लगातार इसी परिस्थिति में रहने की वजह से वह डिप्रेशन, ओसीडी और ऑटिज्म जैसी बीमारियों की शिकार हो गई है.

धीरे-धीरे रेबेका की हालत ऐसी हो गई कि इन्हें शांत वातावरण में नींद आना बंद हो गया क्योंकि पुरानी बातें उसे सोने नहीं देती है. अपना ध्यान भटकाने के लिए इन्हें रात में सोने के लिए तेज आवाज और रोशनी करनी पड़ती है.

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रेबेका के साथ ऐसा क्यों हो रहा है अगर हम इस पर गौर करें तो पाएंगे कि सबसे बड़ा कारण तो उसकी तेज याददाश्त है और इस तेज याददाश्त की वजह से भूलने की आदत का समाप्त हो जाना है.

दरअसल ईश्वर ने हमारा दिमाग समय के साथ भूलने के हिसाब से बनाया है. इंसान की जिन्दगी में सुख और दुःख आते जाते रहते हैं. ईश्वर ने इंसान में भूलने का गुण इसीलिए डाला है ताकि समय बीतने के साथ-साथ वो अपने दुखों को भूल जाए.

अगर हम समय के साथ दुःख देने वाली घटनाओं को नहीं भूलेंगे तो इन घटनाओं को याद करके हम हमेशा दुखी और टेंशन में रहेंगे. लगातार इस तरह की सिचुएशन में रहने की वजह से हम कई प्रकार की बीमारियों से घिर जायेंगे, जिसका नतीजा यह होगा कि हमारी हेल्थ बिगड़ जाएगी.

इसलिए जो लोग सोचते हैं कि याददाश्त बहुत तेज होनी चाहिए वो समझ सके है कि बहुत अधिक तेज याददाश्त का क्या नतीजा हो सकता है हालांकि दुनिया में ऐसे केस काफी कम पाए जाते हैं.

What is hyperthymesia?

रेबेका के केस में जो बहुत तेज याददाश्त है उसे मेडिकल लैंग्वेज में हाइपरथाइमेसिया (Hyperthymesia) or highly superior autobiographical memory (HSAM) के नाम से जानते हैं. पूरी दुनिया में इस बीमारी के 60 रोगी है.

इस बीमारी के रोगी बहुत कम है और जब रोगी बहुत कम होते हैं तो उस बीमारी को कोई भाव नहीं देता है. मेरा इस बीमारी के बारे में बात करने का उद्देश्य सिर्फ इतना ही है कि आप इसके बारे में जानें.

आप ये समझे कि किसी भी चीज की अति हमेशा नुकसानदायक होती है भले ही वो मेमोरी ही क्यों ना हो. अंत में एक महत्वपूर्ण बात यह है कि मेमोरी का सीधा सम्बन्ध हमारे ब्रेन से है, इसलिए मेमोरी शार्प करने के लिए फ़ूड सप्लीमेंट्स उपयोग में लेने से पहले दस बार सोचना चाहिए.

बिना स्पेशलिस्ट से कंसल्ट किये ऐसे सप्लीमेंट्स का उपयोग करने से दिमाग के कोई केमिकल लोचा पैदा हो सकता है. इसलिए बहुत सावधानी से फैसला करना चाहिए.

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Written By

ramesh sharma

Ramesh Sharma (M Pharm, MSc (Computer Science), MA (History), PGDCA, CHMS)

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