LSDV causes LSD in cattle

क्या जानवरों से इंसानों में फैल सकती है Lumpy Skin Disease?, Can Lumpy Skin Disease be transmitted from animals to humans?

अभी कोरोना का असर थोडा कम हुआ ही है कि एक दूसरी नई बीमारी ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है. जहाँ कोरोना का असर इंसानों पर पड रहा था वहीँ इस बीमारी का असर जानवरों पर पड रहा है.

जिन जानवरों पर इस बीमारी का सबसे ज्यादा असर पड रहा है उनमे गाय, बैल और भैंस सबसे ज्यादा है. अगर इनमे भी बात करें तो इस बीमारी से सबसे ज्यादा गाये संक्रमित हो रही हैं और मर रही हैं. इस बीमारी का नाम है लम्पी स्किन डिजीज, जिसे शोर्ट में LSD  के नाम से जानते हैं.

आइये हम इस LSD के बारे में जानते हैं कि आखिर ये कौनसी बीमारी है, ये कैसे होती है, इसके लक्षण क्या हैं?, इसमें क्या क्या सावधानियाँ रखनी चाहिए और इसका इलाज क्या है?

What is the cause of lumpy skin disease?

LSD एक वायरस से होने वाली बीमारी है जिसे लम्पी स्किन डिजीज वायरस यानि LSDV के नाम से जाना जाता है. यह वायरस Capripox Genus का वायरस है जिसकी दो समान Species और है जिन्हें Sheeppox और Goatpox के नाम से जाना जाता है.

LSD पशुओं में होने वाली कोई नई बीमारी नहीं है. वर्ष 1929 में ज़ाम्बिया में इस बीमारी का सबसे पहले पता चला था. अब बात करते हैं इस बीमारी के ट्रांसमिशन के बारे में, मतलब ये बीमारी एक पशु से दूसरे पशु में फैलती कैसे है?

यह बीमारी गर्म और गीले मौसम में ज्यादा फैलती है. गर्म और गीले मौसम से मतलब है बारिश के मौसम के बीच बीच में ऐसा समय जब गर्मी भी ज्यादा पड़ती है यानि उमस वाले दिन.

जब ठण्ड आती है तो यह बीमारी फैलना कम हो जाती है यानि सर्दी के मौसम में इस बीमारी का असर कम होने लगता है. जिस क्षेत्र में LSD के लक्षण दिखाई देते हैं, यह उस क्षेत्र से 50 किलोमीटर की दूरी तक ज्यादा फैलती है.

LSD मुख्यतया इंसेक्ट्स यानि कीड़ों से, मच्छरों से, मक्खियों से और टिक्स से फैलती है. टिक्स वो छोटे कीड़े होते हैं जो पशुओं के शरीर में घुसकर उनका खून पीते रहते हैं. इन्हें चींचडे भी कहा जाता है. बीमारी फ़ैलाने वाले इन सभी को वेक्टर्स कहा जाता है.

ये वेक्टर्स एक संक्रमित और बीमार पशु से दूसरे स्वस्थ पशु तक बीमारी को पहुँचाते है. मच्छर और टिक्स बीमार जानवर का खून पीकर खुद संक्रमित हो जाते हैं, बाद में स्वस्थ पशु को काटकर उसके खून में LSD वायरस को पहुँचा देते हैं जिससे स्वस्थ पशु भी बीमार हो जाता है. इस प्रकार यह इन्फेक्शन फैलता रहता है.

इसके साथ ही आस पास फैली गन्दगी, कोंटामिनेटड (Contaminated) यानि दूषित पानी, चारा, लार आदि से भी ये बीमारी फैलती है.

यहाँ पर ये भी एक प्रश्न उठता है कि क्या यह बीमारी पशुओं से इंसानों में भी फैलती है? तो इसका जवाब ये है कि अभी तक हुई रिसर्च के अनुसार इंसानों में इस बीमारी के फैलने का खतरा न के बराबर है.

इसका मतलब यह है कि ये बीमारी पशुओं से इंसानों में ना तो दूध के जरिये और ना ही किसी और तरीके से फैलती है. हालांकि बीमार पशुओं को छूते समय ग्लब्स का प्रयोग और साफ़ सफाई का पूरा ध्यान रखा जाना अवश्य चाहिए.

What are the symptoms of lumpy skin disease?

अब आगे यह बड़ा प्रश्न है कि इस बीमारी का पता कैसे चलता है? दरअसल इस बीमारी के होने के बाद पशु में कुछ लक्षण प्रकट होते हैं जिनमे सबसे प्रमुख लक्षण उसके पूरे शरीर पर छोटी छोटी गाँठे बनना शुरू हो जाना है. इन गाँठो को स्किन Nodules कहा जाता है.

कुछ पशुओं में ये गाँठे छोटी और कम होती है और कुछ में 3 सेंटीमीटर तक चौड़ी हो सकती है. ये गाँठे पशु के सिर, गर्दन, पैर, थन और जननांगों पर ज्यादा दिखाई देती है. धीरे धीरे ये गाँठे घाव का रूप ले लेती है.

पशु बैचेन होने लगता है, उसकी आँखों और नाक से पानी टपकने लगता है, बुखार हो जाता है और दूध बनने में अचानक से कमी हो जाती है. हालाकि, बुखार और दूध में कमी दूसरे कारणों से भी हो सकती है.

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इस बीमारी के अगर फैलाव की बात करें तो Food and Agricultural Organisation (FAO) के अनुसार यह बीमारी झुण्ड में लगभग 10% पशुओं में फ़ैल सकती है लेकिन इससे मृत्यु की दर लगभग 1% तक ही होती है. यानि यह बीमारी इतनी ज्यादा खतरनाक नहीं है जितना इसे बताया जाता है.

LSD का पता लेबोरेटरी में टेस्ट करके किया जाता है. जब किसी पशु में ये बीमारी होती है तो उसमे एंटीबाडीज बनने लग जाती है. इस टेस्ट के माध्यम से इन एंटीबाडीज को चेक करके या वायरस के DNA को चेक करके LSD को कन्फर्म किया जाता है.

यहाँ पर यह ध्यान रखने की बात यह है कि इस बीमारी से मिलती जुलती दूसरी कई बीमारियाँ और भी होती हैं तो हमें इस फैक्टर को भी ध्यान में रखना चाहिए कि ऐसे लक्षणों वाली दूसरी सभी बीमारियाँ LSD नहीं होती है.

What is the prevention of lumpy skin disease?

इस बीमारी की रोकथाम के लिए हमें उन सभी कारणों को दूर करना होगा जिनकी वजह से ये बीमारी फैलती है. सबसे पहले तो हमें उन सभी स्वस्थ पशुओं को संक्रमित पशुओं से अलग कर देना चाहिए नहीं तो ये बीमारी जल्दी ही सभी पशुओं में फ़ैल सकती है.

कोरोना बीमारी की वजह से सभी लोग क्वारंटाइन (Quarantine) शब्द को अच्छी तरह से समझ गए हैं. हमें LSD में भी संक्रमित पशुओं को क्वारंटाइन करना होगा.

इसके साथ ही सभी पशुओं की साफ़ सफाई का विशेष ध्यान रखना होगा. इन्फेक्शन फ़ैलाने वाले मक्खी, मच्छर और इंसेक्ट्स को मारने के लिए इंसेक्टिसाइड केमिकल्स का प्रयोग करना चाहिए.

What is the treatment for lumpy skin disease?

अगर ट्रीटमेंट की बात करें तो इस वायरस का कोई ट्रीटमेंट नहीं है. आप ये अच्छी तरह से समझ ले कि वायरस से होने वाले रोगों में ज्यादातर मेडिसिन्स काम नहीं करती है, एंटीबायोटिक्स तो बिलकुल भी नहीं.

हर वायरस की एक लाइफ साइकिल होती है और इस लाइफ साइकिल के बाद वह अपने आप ही कमजोर होने लगता है. ये बात डॉक्टर्स को भी पता होती है और वो परिस्थिति के अनुसार निर्णय लेते हैं, बीमारी की वजह से सेकेंडरी इन्फेक्शन से बचने के लिए अगर एंटीबायोटिक्स की जरूरत होती है, तो दी जाती है.

दर्द और बुखार के लिए दर्द और बुखार में काम में आने वाली मेडिसिन्स जैसे पेरासिटामोल दी जा सकती है. इस बीमारी को रोकने में वैक्सीन काफी असरदार साबित होती है. ये वैक्सीन सभी स्वस्थ पशुओं को लगाया जाता है ताकि उन पर इस बीमारी का असर ना पड़े.

इस प्रकार हम देख सकते हैं कि इस बीमारी का इलाज इससे बचाव ही है. इसलिए अपने पशुओं की साफ़ सफाई  का विशेष ध्यान रखें ताकि इस बीमारी को फैलने से रोका जा सके.

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Written By

ramesh sharma

Ramesh Sharma (M Pharm, MSc (Computer Science), MA (History), PGDCA, CHMS)

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