fast food effects

हमें Fast Foods क्यों नहीं खाने चाहिए?, Why should not we eat Fast Foods?

फ़ास्ट फ़ूड यानि वेस्टर्न फ़ूड का उपयोग दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है. जल्दी से तैयार हो जाने के साथ-साथ इसका एडिक्शन पैदा कर देने वाले स्वाद की वजह से यह युवाओं की पहली पसंद बनता जा रहा है.

फ़ास्ट फ़ूड वेस्टर्न कन्ट्रीज की देन है जिनमे सबसे प्रमुख अमेरिका है. यह सच्चाई है कि हम भारतीय लोग पहले इंग्लैंड के अंग्रेजों को फॉलो करते थे और अब अमेरिकन कल्चर से बहुत प्रभावित है. दरअसल हम लोग वेस्टर्न कन्ट्रीज के कल्चर को फॉलो करते-करते अब उनकी फ़ूड हैबिट्स को भी फॉलो करने लग गए हैं.

Western food is becoming status symbol

जिस प्रकार इंग्लिश बोलना मॉडर्न होने का सिंबल बन गया है उसी प्रकार वेस्टर्न फ़ूड खाना भी मॉडर्न होने का सिंबल बनता जा रहा है. अपने फ्रेंड सर्किल के अन्दर अलग-अलग प्रकार के फास्ट फ़ूड और उनके स्वाद के बारे में बातचीत करना महत्वपूर्ण बनता जा रहा है.

फ़ास्ट फूड्स में न्यूट्रीशनल वैल्यूज ना के बराबर होने के बावजूद भी इसने बहुत से लोगों के एक समय के भोजन तक की जगह ले ली है. इंस्टेंट अवैलेबिलिटी की वजह से अब पेरेंट्स के सामने अपने बच्चों के भोजन के लिए फ़ास्ट फूड्स के रूप में अनेक प्रकार के ओपशंस अवेलेबल हो गए हैं.

सबसे पहले तो हमें इस वेस्टर्न फूड्स यानि फास्ट फूड्स को ठीक से समझना होगा. दरअसल फ़ास्ट फूड्स बहुत तेजी से तैयार होने वाले या फिर पहले से तैयार वो खाने की चीजें होती हैं जो अपनी स्पीड ऑफ़ सर्विस के लिए जानी जाती है.

Fast food is highly processed food

ये एक हाइली प्रोसेस्ड फ़ूड होता है जिसमे कई प्रकार के बर्गर, पिज़्ज़ा, हॉट डॉग, डोनट्स, सैंडविच, फ्राइड चिकन के साथ-साथ सॉफ्ट ड्रिंक्स भी शामिल हैं.

पेरेंट्स भी अपने बच्चों को लाड प्यार में जाने अनजाने में कहीं ना कहीं फास्ट फ़ूड के स्वाद का दीवाना बना रहे हैं जबकि फास्ट फ़ूड के लिए सभी लोगों को इतना तो पता है ही कि इन्हें खाने से मोटापा बढ़ता है.

यह मोटापा यानि ओबेसिटी बहुत सी बीमारियों को जन्म देता है. फ़ास्ट फूड्स में बहुत ज्यादा मीठा और बहुत ज्यादा नमक होने की वजह से ये अन्य कई प्रकार की बीमारियों को भी जन्म देते हैं.

इसके साथ ही अधिकाँश फ़ास्ट फूड्स मैदा से बने होते हैं. ये मैदा हमारे डाइजेशन को खराब करता है जिसकी वजह से बहुत सी पेट की बीमारियाँ हो जाती है.

अब एक नई रिसर्च के अनुसार इन सभी बीमारियों के अतिरिक्त फ़ास्ट फूड्स हमारे शरीर में कई प्रकार की ऑटोइम्यून डिजीज भी पैदा करते हैं.
ऑटोइम्यून डिजीज वो बीमारियाँ होती हैं जिनमे हमारे शरीर का इम्युनिटी सिस्टम कंफ्यूज होकर हमारे शरीर के कई हिस्सों पर अटैक कर देता है.

इसका नतीजा यह होता है कि जिस हिस्से पर ये अटैक करता है उस हिस्से की सेल्स और टिश्यूज डैमेज होकर एक नई बीमारी को जन्म दे देते हैं.
इसे आप इस तरह से समझ सकते हैं कि जैसे कोई सेना कंफ्यूजन में अपने ही सैनिकों को दुश्मन के सैनिक समझकर मारने लग जाए.

इन ऑटोइम्यून डिजीज में Rheumatoid arthritis, Inflammatory bowel disease, Multiple sclerosis, Type 1 diabetes mellitus, Myasthenia gravis, Graves' disease, Psoriasis,  Vitiligo आदि शामिल हैं.

ये सब बीमारियाँ फ़ास्ट फूड्स की वजह से क्यों होती है? इनके होने का क्या कारण है? दरअसल इस प्रकार के फूड्स में विशेष प्रकार का टेस्ट, टेक्सचर और शेप देने के लिए कई प्रकार के केमिकल्स मिलाये जाते हैं जो कि इन बीमारियों का प्रमुख कारण होता है.

अगर प्री-पैक्ड फूड्स की बात की जाए तो अमेरिका में 1200 से अधिक प्री-पैक्ड फूड्स में preservatives के रूप में Tertiary -Butyl Hydro Quinone (TBHQ) और Per Fluoro Alkyl or Poly Fluoro Alkyl Substances (PFAS) पाए गए हैं.

इन दोनों केमिकल्स की वजह से हमारा इम्यून सिस्टम सप्रेस हो जाता है जिसका नतीजा cancer, thyroid disease, decreased fertility, low birth weight और food allergies के रूप में सामने आता है.

फ़ास्ट फूड्स में प्लास्टिक की तरह खिंचने वाला गुण पैदा करने के लिए इसमें plasticizers मिलाये जाते हैं जिनमे phthalates सबसे ज्यादा काम में लिए जाते हैं.

इन phthalates की वजह से hormone activity में बदलाव के साथ-साथ बच्चों में developmental issues, asthma, obesity और fertility problems का खतरा बना रहता है.

प्रोसेस्ड फ़ूड के टेस्ट पर विशेष ध्यान दिया जाता है. कई सालों की रिसर्च के बाद इनका विशेष टेस्ट डेवलप किया गया है. इनका विशेष टेस्ट खाने वालों में एडिक्शन सा पैदा कर देता है जिसकी वजह से इन्हें बार-बार खाने का मन करता है.

साथ ही इन फूड्स की textural or sensory properties को भी इस प्रकार बनाया जाता है कि इन्हें बहुत तेजी खाया जा सके. जब हम बहुत तेजी से खाते हैं तो हमारा पेट हमारे ब्रेन को पेट भरने का प्रॉपर सिग्नल नहीं भेज पाता है, इसका नतीजा मोटापे के रूप में सामने आता है.

Preservative-packed foods बहुत ज्यादा chemical वाले होते हैं जिनमे snacks, chips और fast food शामिल होते हैं, हमारी मेमोरी को कम करते हैं. इसके उलट अगर हम नट्स खायेंगे तो ये हमारी मेमोरी को बढ़ाते हैं.

तो आज हमने ये जाना है कि फ़ास्ट फूड्स को खाने से हमारे शरीर पर क्या प्रभाव पड़ता है. अब ये आप पर निर्भर करता है कि आप पता होने के बावजूद क्या निर्णय लेते हैं.

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Written By

ramesh sharma

Ramesh Sharma (M Pharm, MSc (Computer Science), MA (History), PGDCA, CHMS)

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