Importance of Cow as Kamdhenu

आखिर क्यों हमने Doctor Cow को Patient बना दिया?, Why did we make Doctor Cow a Patient?

गाय वैदिक काल से ही भारतीय धर्म और संस्कृति, सभ्यता की प्रतीक रही है. 'गावो विश्वस्य मातर:'. गाय समान रूप से विश्व के मानव मात्र का कल्याण करने वाली मां है.

ऋग्वेद में वर्णित है कि 'जिस स्थान पर गाय सुख पूर्वक निवास करती है वहां की मिट्टी तक पुनीत हो जाती है, वह स्थान तीर्थ बन जाता है.' हमारे जन्म से मृत्युपर्यंत सभी संस्कारों में गाय से प्राप्त पंचगव्य (दूध, दही, घी, गोबर, गोमूत्र) और पंचामृत (दूध, दही, घी, मिश्री, तुलसी) की अनिवार्य अपेक्षा रहती है.

देश मे सदैव से गोधन को ही 'धन ' माना जाता रहा है. कृषि के लिए बैल, उत्तम खाद के अतिरिक्त गाय हमें शरीर और मस्तिष्क को पुष्ट करने के लिए अमृततुल्य दुग्ध भी प्रदान करती है.

स्वास्थ्य की दृष्टि से गौ दुग्ध, गोदधि (दही), गोतक्र (छाछ) अत्यावश्यक है. इनसे अनेक प्रकार के रोग दूर होते हैं. आयुर्वेद एवं आधुनिक विज्ञान के अनुसार भी शरीर स्वास्थ्य एवं रोग निवृत्ति के लिए गाय के दूध, दही, मट्ठा, मक्खन,घृत, मूत्र, गोबर आदि का अत्यंत उपयोग है.

गोमूत्र औषधियों के शोधन में प्रयुक्त होता है. लीवर, तिल्ली,पाचन यंत्रों के विकार होने पर उनके सुधार के लिए गोमूत्र का प्रयोग सफलता देता हैं. गोबर का प्रयोग भी शोथादि विकारों के शमन के लिए किया जाता है.

गाय के गोबर की क्षमता आज के वैज्ञानिकों ने भी पहचानी है. गाय के गोबर में आणविक दुष्परिणामों को अवरुद्ध करने की क्षमता है. पर्यावरण के संरक्षण की दृष्टि से गाय का कोई विकल्प नहीं है.

गाय अपने श्वास-प्रश्वास के द्वारा अनगिनत कीटाणुओं के क्षेत्र को शुद्ध करती है. सूर्य से आने वाली घातक कॉस्मिक किरणों से भी गाय का गोबर व गाय के सींग हमारी रक्षा करते हैं.

गौ महिमा हमारी आन, बान और शान है. प्राचीन काल से हम गौ, गंगा, गीता और गायत्री को पूजते आ रहे हैं. हमारे यहां प्रति व्यक्ति के जीवन में 5 माताएं होती है, जन्म दात्री माता, गौ माता, भू माता, वेदमाता और जगत माता मातेश्वरी.

गाय के गोबर से प्राप्त खाद सेधरती की उर्वरता वर्षों तक बरकरार रहती है. जबकि रासायनिक खाद के दुष्प्रभाव आज हम देख ही रहे हैं. गाय का दूध शरीर में स्फूर्ति लाता है इससे आलस्य हीनता दूर होती है.

Importance of cow milk

दूध स्मरण शक्ति बढ़ाता है. गाय का दूध ह्रदय रोगों से बचाता है. क्षय रोग व हैजे के कीटाणु गाय के गोबर और मूत्र से नष्ट हो जाते हैं. गाय का दूध केरोटीन से युक्त सर्व रोग नाशक, सर्व विषविनाशक होता है.

भारतीय गोवंश के मूत्र और गोबर अद्भुत औषध है, इससे अनगिनत औषधियों का निर्माण किया जा रहा है जिसमे गोमूत्र अर्क, चूर्ण, तेल, गोमूत्र घनवटी, आसव, धूपबत्ती, पालरस, पंचगव्य, घृत, पाउडर, शैंपू, साबुन आदि प्रमुख है.

जो की विभिन्न बीमारियों जैसे मोटापा, ह्रदय रोग, रक्तचाप, पथरी, सभी प्रकार के दर्द, अम्ल पीत, एसिडिटी, कब्ज, नींद की कमी, मासिक धर्म की अनियमितता, श्वेत प्रदर, चेहरे पर फुंसियां, चक्कर आना, स्वप्नदोष, डायबिटीज, पेशाब संबंधी रोग, नेत्र विकार, खांसी, अस्थमा, कफ, दाद, एक्जिमा, चर्म रोग, मिर्गी, पागलपन, मंदबुद्धि, तनाव, सिर के बाल असमय सफेद होना व झड़ना, झुर्रियां, सन्धिवात व कमजोरी इत्यादि में लाभप्रद है.

गाय की रक्षा से मनुष्य, देवता, भूत- प्रेत, यक्ष-राक्षस, पशु -पक्षी, वृक्ष-घास आदि सबकी रक्षा होती है. गाय धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष को सिद्ध करने वाली है. भगवान श्री कृष्ण का नाम गोपाल, गोविंद आदि गाय के पालनकर्ता होने के कारण ही है.

गोपालन, गौ-सेवा और गोदान हमारी संस्कृति की महान परंपरा रहे हैं. हिंदू मान्यता के अनुसार गौ के शरीर में 33 कोटि देवी- देवता निवास करते हैं. अस्तु भारतवर्ष के उज्जवल भविष्य का पुनर्निर्माण गोसेवा गोरक्षण एवं गौ माता के आशीर्वाद पर ही आधारित है.

इसलिए संपूर्ण भारत में गोवध निषेध लागू करना चाहिए और संरक्षण और संवर्धन होना चाहिए जिससे इसके द्वारा प्राप्त होने वाले आर्थिक लाभों से देश के विकास एवं जन -जन के स्वास्थ्य का भी रक्षण होगा.

गौमाता में अनंत दिव्य गुण हैं. गाय जीवन के चरम लक्ष्य की प्राप्ति कराने वाली है. गाय के रोम-रोम से सात्विक विकिरण निकलते हैं जिसके प्रभाव क्षेत्र में आगे आने से मनुष्य की चित्तवृत्ति शांत होती है.

गौ यज्ञयीय- देवी- संस्कृति का मूर्त रूप है. गाय मनो:कामनाओं को पूर्ण करने वाली है. गाय प्रेम और त्याग की मूर्ति है. कहते हैं मन की बात या तो भगवान जानते हैं या गाय जानती है.

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गाय को संकट अथवा अनिष्ट जैसे किसी की काल मृत्यु,भूकंप या और कोई विपत्ति का पूर्वाभास रहता है. गाय रक्षा करने वाले की रक्षा करती है. गाय वैतरणी पार कराने वाली है, जो अच्छे काम करते हैं, कहते है वे गाय की पूँछ पकड़ कर स्वर्ग लोक मे ले जाने वाली वेतरणी पार करते हैं.

गाय का गोबर मल नहीं मलशोधक है, यही नहीं गोमूत्र एक अदभुत औषधि जिससे कई बीमारियों में अमृततुल्य फायदा होता है. गौ सेवा ही ईश्वर की सेवा है.

तुलसी पौध न मानिये, गाय न मानिए ढोर
ब्राह्मण मनुज न मानिये, तीनों नंदकिशोर.

गायों के इतने फायदे होने के बावजूद आज कलयुग के प्रभाव के कारण हम इसका महत्व नहीं समझ पा रहे हैं. गाय: विश्वस्य मातर:, अर्थात गाय संपूर्ण विश्व की मां है. शास्त्रों में गाय को कामधेनु अर्थात सब फल देने वाली कहा है.

Kamdhenu cow in Samudra Manthana

समुद्र मंथन में निकले 14 रत्नों में से एक गाय भी थी, अतः हमें अधिक से अधिक गायों को पालना चाहिए, उनकी रक्षा करनी चाहिए, उनकी सेवा करनी चाहिए, उन्हें कभी भी नहीं मारना चाहिए या मरने के लिए नहीं छोड़ना चाहिए.

गाय की आंख से निकला एक भी आंसू प्रकृति में हलचल मचा देता है. गाय के शरीर में सभी देवताओं का वास है. कई रोग जैसे कैंसर तक इससे प्राप्त पदार्थों के सेवन से दूर हो जाते हैं, कई लोग इसके प्राप्त पदार्थों के सेवन से दूर हो जाते हैं.

अतः इसे 'डॉक्टर काऊ' कहना सर्वथा उचित हैं. सतयुग और त्रेता युग में जब-जब  भी पृथ्वी पे कोई संकट आता था तो पृथ्वी गाय का रूप लेकर त्रिदेव के पास अपना दुख सुनाने जाती थी.

भगवान भी गौ, पृथ्वी, ब्राह्मण और संत  की रक्षा के लिए विविध अवतार लेते हैं. राम के पूर्वज दिलीप ने गौ की रक्षा के लिए शेर रूपी देवराज के सामने अपने प्राणो को प्रस्तुत कर दिया था.

राजस्थान के कई  लोक देवता गोगाजी, पाबूजी, तेजाजी, बिग्गाजी, बाबा झुंझार जी, पनराज जी आदि गायों की रक्षार्थ शहीद हुए थे. मेवाड़ की स्थापना करने वाले बाप्पा रावल भी बचपन में गायें चराते थे.

अति आधुनिकता में और वर्तमान मशीनीकरण  के युग में सबसे बड़ा संकट गौ माता  के परिवार पर आया हैं, ट्रेक्टर से बैल बेकार हो गाये हैं. बेतहाशा गौ परिवार का क़त्ल किया जा रहा हैं और तो और छोटे -छोटे बछड़ों को भी नर्म चमड़े के लालच में बक्शा नहीं जा रहा हैं.

पर्याप्त मात्र में चारा नहीं मिलने के कारण और लोगो द्वारा प्लास्टिक में फेंका गया खाना खाने के कारण बहुत सा गौधन प्लास्टिक से असमय मौत के मुंह में जा रहा हैं.

आज गाय लम्पी नामक रोगाणु जनित  घातक  बीमारी से जूझ रही है, जिससे संक्रमित होकर बहुत गाये मर रही हैं. इसमें हमें इनकी रक्षा करनी होंगी.

वहां मनुष्य शांति और सुख से रह पाते हैं हमें यह ध्यान रखना होगा और जो आज आफत और संकट आए हैं उससे हमें इनको निजात दिलानी होगी, अब हम संकल्प लें कि सभी हम इनकी रक्षा करें और गायों को पालने वाले को हम अधिक से अधिक सेवा और सहायता प्रदान करें. गाय बचेगी तो हम सब बचेंगे.

Written By

Kamal SIngh Rathore

Dr. Kamal Singh Rathore, HoD (Pharmaceutics), Associate Professor and Public Relations Officer, Bhupal Nobles' College of Pharmacy, BN University, Udaipur, Rajasthan
Contact Number - 9828325713

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