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फार्म डी एवं बी फार्म में से कौनसा कोर्स चुनें?

भारत में वर्ष 2008 से फार्म डी कोर्स की शुरुआत के साथ ही फार्मेसी में एडमिशन लेने के इच्छुक विद्यार्थियों के लिए कन्फ्यूजन का एक पॉइंट और पैदा हो गया कि फार्म डी और बी फार्म में से कौनसा कोर्स चुनें.

वर्ष 2008 से पहले जब फार्म डी कोर्स भारत में नहीं था तब डी फार्म एवं बी फार्म को लेकर iइसी प्रकार के कन्फ्यूजन की स्थिति बनी रहती थी.

डी फार्म और बी फार्म में इतना तो पता लग ही जाता था कि डी फार्म डिप्लोमा लेवल का कोर्स है और बी फार्म ग्रेजुएशन लेवल का कोर्स है, लेकिन अब फार्म डी कोर्स के शुरू होने के बाद कन्फ्यूजन बढ़ गया है.

आज हम इस सम्बन्ध में बात करते हैं कि फार्म डी और बी फार्म कोर्स में क्या डिफरेंस है जिससे एक बारहवीं पास विद्यार्थी बड़ी आसानी से अपने लिए उपयुक्त कोर्स का चयन कर सके.

Main difference between pharm d and b pharm course

सबसे पहले हम इन दोनों कोर्सेज में क्या-क्या फर्क है, इस सम्बन्ध में पॉइंट टू पॉइंट बात करते हैं.

पहली और सबसे अधिक इम्पोर्टेन्ट बात तो यह है कि हमें इन दोनों कोर्सेज को समझना होगा कि आखिर ये कोर्स क्या हैं. अगर हम फार्म डी कोर्स की बात करें तो इस कोर्स का पूरा नाम डॉक्टर ऑफ़ फार्मेसी है जो कि छः वर्ष का कोर्स है.

यह कोर्स फार्मेसी में एक प्रोफेशनल पोस्ट ग्रेजुएट डॉक्टरेट प्रोग्राम है जिसके छः वर्षों कि समयावधि में पाँच वर्ष की एकेडेमिक स्टडी एवं एक वर्ष की इंटर्नशिप या रेजीडेंसी होती है.

अगर हम बी फार्म कि बात करे तो इस कोर्स का पूरा नाम बैचलर ऑफ़ फार्मेसी है जो कि चार वर्ष का बैचलर डिग्री कोर्स होता है और आठ सेमेस्टर में विभाजित होता है. सभी आठ सेमेस्टर में मुख्यतः एकेडेमिक स्टडी ही होती है.

दूसरा इम्पोर्टेन्ट पॉइंट यह है कि फार्म डी कोर्स के बाद में डॉक्टर यानि Dr टाइटल लगाने का अधिकार मिल जाता है. इस कोर्स को करने के बाद कोई भी कैंडिडेट अपने नाम के पहले डॉक्टर लगा सकता है लेकिन एक बी फार्म कैंडिडेट ऐसा नहीं कर सकता है.

तीसरी सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि फार्म डी कोर्स में दो तरह से एडमिशन लिया जा सकता है, पहला तरीका यह है कि कोई भी विद्यार्थी जिसने फिजिक्स और केमिस्ट्री के साथ बायोलॉजी या मैथ्स सब्जेक्ट के साथ बारहवी क्लास पास की है, फार्म डी कोर्स में एडमिशन ले सकता है.

दूसरा तरीका यह है कि कोई भी स्टूडेंट जिसने फार्मेसी कौंसिल ऑफ़ इंडिया से एप्रूव्ड किसी भी कॉलेज या यूनिवर्सिटी से बी फार्म किया है, फार्म डी कोर्स के फोर्थ ईयर में एडमिशन ले सकता है. इस प्रकार के एडमिशन को लेटरल एंट्री कहा जाता है.

लेटरल एंट्री वाले कैंडिडेट्स को फार्म डी पोस्ट बकलौरिएट (Pharm.D - Post Baccalaureate) कोर्स में एडमिशन दिया जाता है जहाँ उसे दो वर्ष की एकेडेमिक स्टडी एवं एक वर्ष की इंटर्नशिप या रेजीडेंसी करनी होती है.

अगर बी फार्म कि बात कि जाए तो कोई भी विद्यार्थी जिसने फिजिक्स और केमिस्ट्री के साथ बायोलॉजी या मैथ्स सब्जेक्ट के साथ बारहवी क्लास पास की है, बी फार्म कोर्स में एडमिशन ले सकता है.

साथ ही कोई भी स्टूडेंट जिसने फार्मेसी कौंसिल ऑफ़ इंडिया से एप्रूव्ड किसी भी कॉलेज या यूनिवर्सिटी से डी फार्म किया हो, बी फार्म कोर्स के सेकंड ईयर में एडमिशन ले सकता है. इस प्रकार के एडमिशन को भी लेटरल एंट्री कहा जाता है.

चौथा पॉइंट यह है कि फार्म डी कोर्स का प्रमुख कंटेंट क्लिनिकल फार्मेसी पर बेस्ड है जो कि पूरी तरह हॉस्पिटल ओरिएंटेड है और जिसमे हॉस्पिटल में ट्रेनिंग भी शामिल है, जबकि बी फार्म कोर्स मुख्यतया इंडस्ट्री और कम्युनिटी ओरिएंटेड कोर्स है जिसमे ड्रग मैन्युफैक्चरिंग और रिसर्च प्रमुख है.

पाँचवा पॉइंट भारत में इन दोनों कोर्सेज के स्कोप और करियर आप्शन को लेकर है. फार्म डी के बाद में हॉस्पिटल्स में क्लिनिकल फार्मासिस्ट की पोस्ट पर नियुक्ति प्राप्त की जा सकती है.

अभी कुछ समय पहले फार्मेसी कौंसिल ऑफ़ इंडिया ने इस सम्बन्ध में नोटिफिकेशन भी निकाला था. इंडस्ट्री में भी क्लिनिकल रिसर्च के क्षेत्र में फार्म डी कैंडिडेट्स की डिमांड रहती है.

साथ ही फार्मेसी कॉलेजेस में टीचिंग के क्षेत्र में भी करियर के ऑप्शन हैं. फार्म डी क्वालिफिकेशन होल्डर कैंडिडेट अपने स्टेट की फार्मेसी कौंसिल में रजिस्ट्रेशन करवाकर रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट के बतौर भी कार्य कर सकता है यानि अपनी फार्मेसी भी शुरू कर सकता है.

एक बी फार्म कैंडिडेट हॉस्पिटल में क्लिनिकल फार्मासिस्ट की पोस्ट के लिए अप्लाई नहीं कर सकता क्योंकि इसके लिए केवल फार्म डी कैंडिडेट ही एलिजिबल किया गया है.

बी फार्म कैंडिडेट ड्रग इंडस्ट्री में प्रोडक्शन, क्वालिटी कण्ट्रोल, रिसर्च, मार्केटिंग के साथ-साथ एक रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट के रूप में अपनी सेवाएँ दे सकता है. गवर्नमेंट सेक्टर में बी फार्म कैंडिडेट ड्रग इंस्पेक्टर की पोस्ट के लिए भी एलिजिबल है.

अगर भारत से बाहर करियर और स्कोप की बात की जाए तो फार्म डी कोर्स बी फार्म से बेहतर है. बहुत से फॉरेन कन्ट्रीज में केवल फार्म डी कैंडिडेट्स को ही जॉब के लिए एलिजिबल किया जाता है बी फार्म को नहीं.

अमेरिका की बात करे तो वहाँ कार्य करने के लिए न्यूनतम योग्यता फार्म डी ही है. कुल मिलाकर अगर आपको भारत से बाहर कार्य करना है तो आप केवल फार्म डी कोर्स में एडमिशन लें. भारत से बाहर बी फार्म कोर्स की अधिक उपयोगिता नहीं है.

छठा पॉइंट इन दोनों कोर्सेज के बाद में आगे की स्टडीज को लेकर है. फार्म डी कोर्स एक डॉक्टरल लेवल का पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स है. अगर आप इस कोर्स को करने के बाद में पीएचडी प्रोग्राम में एडमिशन लेना चाहते हैं तो आप ले सकते हैं.

बी फार्म के बाद पीएचडी प्रोग्राम में एडमिशन के लिए पहले दो वर्ष की समयावधि का चार सेमेस्टरों में विभाजित एम फार्म कोर्स करना होगा उसके बाद में पीएचडी प्रोग्राम में एडमिशन लिया जा सकता है.

इस प्रकार अगर देखा जाए तो फार्म डी और बी फार्म कोर्स में ये कुछ मूलभूत डिफरेंस हैं जिनका एक स्टूडेंट को एडमिशन लेने से पहले पता होना चाहिए.

Written By

ramesh sharma

Ramesh Sharma (M Pharm, MSc (Computer Science), MA (History), PGDCA, CHMS)

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