pharmacist as food safety officer

डॉक्टर की जगह फार्मासिस्ट कर सकता है फूड ऑफिसर के रूप में काम, Pharmacist can work as Food Safety Officer instead of Doctor

परसों के अखबार में एक न्यूज़ पर ध्यान गया जिसका टाइटल था कि फ़ूड सेफ्टी ऑफिसर्स की कमी इसलिए मिलावट रोकेंगे डॉक्टर. खबर के अनुसार डॉक्टर्स को मिलावट रोकने के लिए ट्रेनिंग दी जाएगी और उसके बाद में ये बाजार से सैंपल लेकर उसकी लैब में जाँच करवाएंगे और मिलावट पाए जाने पर व्यापारी के खिलाफ कार्यवाही की जिम्मेदारी भी निभाएंगे.

इस खबर को पूरा पढने के बाद मन में एक प्रश्न उठा कि आखिर सरकार की नजर में डॉक्टर्स के अलावा दूसरा कोई और इस काम को करने के लिए योग्य क्यों नहीं हैं?

हेल्थ सेक्टर की अधिकाँश इम्पोर्टेन्ट जिम्मेदारियाँ अकेले डॉक्टर्स के कंधे पर क्यों ड़ाल दी जाती हैं? एक तो भारत में वैसे ही डॉक्टर्स की काफी कमी है दूसरा इन्हें पेशेंट देखने के अलावा इन कामों में क्यों धकेला जा रहा है? डॉक्टर्स अपने मुख्य काम के अलावा इन दूसरे कामों को करने से मन क्यों नहीं करते हैं?

डॉक्टर का मुख्य काम है पेशेंट का इलाज करना और अपनी पढाई के दौरांन इन्हें केवल यही सिखाया जाता है. इनसे केवल वो ही करवाना चाहिए जो इन्होने सीखा है और जिसमे ये माहिर है, फिर इन्हें ऐसे दूसरे कामों में क्यों लगाया जा रहा है जिन्हें करने के लिए दूसरे प्रशिक्षित लोग पहले से ही मौजूद हैं.

आप सोचेंगे कि ये दूसरे प्रशिक्षित लोग कौन हैं, मैं बात कर रहा हूँ ड्रग इंस्पेक्टर्स, ड्रग कण्ट्रोल ऑफिसर्स और फार्मासिस्ट्स के बारे में. ड्रग इंस्पेक्टर्स और ड्रग कण्ट्रोल ऑफिसर्स तो पहले से ही दवाइयों के सैंपल लेकर उसे लैब में चेक करवाकर मिलावट के खिलाफ कार्यवाही को अंजाम दे रहे हैं तो फिर डॉक्टर्स की जरूरत क्यों है? अगर जरूरत है भी तो डॉक्टर्स को क्यों लिया जा रहा है जिनकी देश में पहले से ही बहुत कमी है.

Government must recruit food safety officers

सरकार को या तो नए फ़ूड सेफ्टी ऑफिसर्स की भर्ती करनी चाहिए या फिर जो लोग इस टाइप के काम को कर रहे हैं उनसे ये काम करवाना चाहिए. इस काम के लिए ड्रग इंस्पेक्टर और ड्रग कण्ट्रोल ऑफिसर  पूरी तरह से योग्य हैं डॉक्टर्स का तो दूर-दूर तक ऐसे कामों से कोई लेना देना नहीं होता है.

खबर में यह भी लिखा है कि राजस्थान में अभी सिर्फ 48 फ़ूड सेफ्टी ऑफिसर्स ही कार्यरत हैं. अब आप अंदाजा लगा सकते हैं कि इतने बड़े राजस्थान में मिलावट के खिलाफ जंग में नाम मात्र के योद्धा ही मौजूद हैं. ये हालत सिर्फ राजस्थान के नहीं हैं, पूरे भारत के यही हाल हैं.

इसी तरह के हालात फार्मा सेक्टर में है जहाँ दवाइयों में मिलावट रोकने के लिए ड्रग इंस्पेक्टर्स भी काफी कम संख्या में है. इन बातों से आप अंदाजा लगा सकते हैं कि खाने पीने की चीजों के साथ-साथ मेडिसिन्स में मिलावट को रोकने के लिए हमारी सरकार कितनी जागरूक है.

Also Read राहगीर नाम से पहचान बनाता म्यूजिशियन सुनील गुर्जर

दवाइयों और खाने पीने की चीजों में मिलावट रोकने का काम फर्स्ट प्रायोरिटी पर होना चाहिए लेकिन इस तरह की ख़बरों को देखकर तो लगता है कि शायद ये काम किसी प्रायोरिटी में नहीं है.

सच्चाई यह है कि भारत में सैंपल कलेक्ट करने वाले विशेषज्ञों के साथ-साथ उस सैंपल को चेक करने वाले यानि एनालिस्ट्स की भी भारी कमी है. राजस्थान में तो पिछले कई वर्षों से गवर्नमेंट एनालिस्ट की भर्ती प्रक्रिया भी रुकी हुई है और जब भी प्रक्रिया आगे बढती है तो किसी ना किसी विवाद में फँस जाती है.

खैर मैं सिर्फ इतना कहना चाहता हूँ कि एक तो पहले से ही डॉक्टर्स की भारी कमी है, दूसरा जब ड्रग इंस्पेक्टर्स, ड्रग कण्ट्रोल ऑफिसर और फार्मासिस्ट के रूप में प्रशिक्षित और क्वालिफाइड व्यक्ति मौजूद है तो डॉक्टर्स से ये काम क्यों लिया जा रहा है.

फार्मासिस्ट का तो काम ही दवाइयों से सम्बंधित है. जब फार्मासिस्ट दवाइयों की मैन्युफैक्चरिंग, डिस्ट्रीब्यूशन और स्टोरेज की हर स्टेज को अच्छे से समझ सकता है तो फिर इसके लिए फ़ूड आइटम्स को समझना कौनसा मुश्किल होगा?

और अगर सरकार को लगता है कि फार्मासिस्ट नहीं समझ सकता है तो फिर सरकार यह साफ़ करे कि फिर डॉक्टर इसे कैसे समझेगा. डॉक्टर का तो टेस्टिंग से दूर-दूर का कोई वास्ता ही नहीं रहता है.

जब एक फार्मासिस्ट दवाइयों की मिलावट को रोकने में जिम्मेदारी निभा सकता है तो फिर खाद्य पदार्थों की मिलावट को रोकने में जिम्मेदारी क्यों नहीं निभा सकता है.

सरकार को इस फैक्ट को ध्यान में रखते हुए डॉक्टर्स की जगह या तो फार्मासिस्ट को इस काम में लगाना चाहिए या फिर इसके लिए नई वैकेंसी निकाल कर नए लोगों को रिक्रूट करे, डॉक्टर्स से सिर्फ वो काम करवाए जिसको करने के लिए वे बने हैं यानि मरीजों का इलाज.

Written By

ramesh sharma

Ramesh Sharma (M Pharm, MSc (Computer Science), MA (History), PGDCA, CHMS)

Disclaimer

आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं और इस में दी गई जानकारी विभिन्न ऑनलाइन एवं ऑफलाइन स्त्रोतों से ली गई हो सकती है जिनकी सटीकता एवं विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है. लेख की कोई भी सूचना, तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार Khatu.org के नहीं हैं. आलेख में दी गई किसी भी सूचना की सटीकता, संपूर्णता, व्यावहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति Khatu.org उत्तरदायी नहीं है.

आलेख की जानकारी को पाठक महज सूचना के तहत ही लें. इसके अतिरिक्त इसके किसी भी उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता की ही रहेगी. अगर आलेख में किसी भी तरह की स्वास्थ्य सम्बन्धी सलाह दी गई है तो वह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर लें.

Connect With Us on YouTube

Travel Guide
Health Show