how to prepare for interview

इंटरव्यू में बॉडी लैंग्वेज का क्या महत्व है?, What is the importance of body language in interview?

इंटरव्यू का मतलब साक्षात्कार होता है. इसके अंतर्गत किसी भी व्यक्ति से साक्षात मिला जाता है तथा मिलकर उसकी बुद्धिमत्ता, कार्यक्षमता तथा व्यवहार कुशलता का भली भाँति आंकलन किया जाता है.

नौकरी के लिए अमूमन इंटरव्यू का आयोजन लिखित परीक्षा के उपरांत ही होता है परन्तु कई बार यह बिना लिखित परीक्षा के भी आयोजित किया जा सकता है.

कुल मिलाकर इंटरव्यू के द्वारा किसी भी व्यक्ति के बारे में प्रत्यक्ष रूप से कोई धारणा बनाई जाती है. अगर नौकरियों के नजरिए से देखा जाए तो सरकारी तथा प्राइवेट सेक्टर की नौकरियों के लिए होने वाले इंटरव्यूज में भिन्नता होती है.

Difference between interview pattern in government and private jobs

दरअसल सरकारी कार्य तथा प्राइवेट कार्य करने वाले तथा करवाने वाले दोनों व्यक्तियों की सोच में काफी अंतर होता है.

सरकार में प्रशासनिक सेवाओं के लिए इंटरव्यू में मुख्यतया व्यक्ति के प्रशासनिक गुण तथा त्वरित निर्णय क्षमता पर अधिक बल दिया जाता है वहीँ प्राइवेट सेक्टर में अधिकाधिक बल टारगेट अचीव करने पर दिया जाता है.

निजी क्षेत्र में टारगेट ओरिएंटेड कार्य अधिक प्राथमिकता लिए होते हैं. इंटरव्यू चाहे निजी क्षेत्र के लिए हो और चाहे सरकारी क्षेत्र के लिए, इनमे कुछ बाते समान होती है जो हर उम्मीद्वार में अवश्य होनी चाहिए.

इंटरव्यू लेने वाले व्यक्ति बहुत पारखी होते हैं तथा मात्र पंद्रह बीस मिनट के इंटरव्यू में ही वो किसी भी व्यक्ति के बारे में कोई धारणा बनाकार उसे योग्य या अयोग्य बना देते हैं. इंटरव्यू में बॉडी लैंग्वेज का सर्वप्रमुख रोल होता है.

Body language is your identity

किसी भी व्यक्ति की बॉडी लैंग्वेज उसके बारे में काफी हद तक बता देती है अतः यह कहना भी गलत नहीं होगा कि बॉडी लैंग्वेज किसी भी व्यक्ति के गुणों का आइना होती है.

इंटरव्यू के दौरान सर्वाधिक ध्यान बॉडी लैंग्वेज पर ही दिया जाता है. यहाँ हम आपको अपनी बॉडी लैंग्वेज सुधारने के लिए कुछ जरूरी टिप्स बता रहे हैं जिन्हें अपनाकर आप इंटरव्यू में कुछ हद तक सफलता प्राप्त कर सकते हैं.

सबसे पहले हमें अपने हाव भाव पर पर्याप्त ध्यान देना चाहिए. अधिकतर शोध यह प्रदर्शित करते हैं कि हमारे हाव भाव हमारे बारे में सब कुछ बता देते हैं.

हाव भाव में आँखों तथा हाथों सहित कई चीजे शामिल होती है. इंटरव्यू देते समय उम्मीद्वार को इंटरव्यू लेने वाले से नजरे मिला कर बातें करनी चाहिए.

Confidence is important in interview

नजरे चुराकर बाते करना आत्मविश्वास में कमी का द्योतक है. अल्प आत्मविश्वासी व्यक्ति का चुनाव करना कोई भी पसंद नहीं करता है. अतः इंटरव्यू के दरमियान आँखे मिलाकार बात ना करना सबसे बड़ी गलती में शुमार होता है.

इंटरव्यू के समय अपनी बॉडी लैंग्वेज नियंत्रित होनी चाहिए. इंटरव्यू के दौरान बालों से या चाबी से खेलते हुए बात करना बड़ी गलती के रूप में समझा जाता है.

यह चंचलता का प्रतीक है तथा कार्य के दौरान गैर जिम्मेदाराना रवैये को प्रकट करता है. अतः इंटरव्यू के समय ना तो चाबी घुमानी चाहिए और ना ही बालों में हाथ फिराना चाहिए.

अमूमन इंटरव्यू लेने वाले इंटरव्यू देने वालों से हाथ मिलाते हैं. यह भी एक प्रकार का मौन इंटरव्यू ही है जिसमे उम्मीद्वार के बारे में कुछ धारणा बना ली जाती है.

इंटरव्यू देते समय आत्मविश्वास के साथ हाथ मिलाना चाहिए. ढ़ीले ढाले हाथों से हाथ पकड़ना नकारात्मक होता है. यह आत्मविश्वास में कमी का प्रतीक समझा जाता है. अतः हमें हाथ मिलाते समय प्रयाप्त आत्मविश्वास के साथ हाथ मिलाना चाहिए.

यह जरूर ध्यान में रखना है कि ढीले हाथों से हाथ मिलाना आत्मविश्वास में कमी का प्रतीक होता है परन्तु अत्यधिक कठोरता से हाथ मिलाना अशिष्टता का प्रतीक होता है ना कि अधिक आत्मविश्वास का.

इंटरव्यू के समय जहाँ पर आवश्यक हो वहाँ मुस्कुराकर बात करनी चाहिए. सम्पूर्ण इंटरव्यू में पूर्णतया गंभीर रहना भी नकारात्मक समझा जाता है. इंटरव्यू लेने वाले इस बात को कतई पसंद नहीं करते हैं कि इंटरव्यू के दरमियान माहौल गंभीर रहे.

अनावश्यक रूप से मुस्कुराना तथा हँसना इंटरव्यू में असफलता का प्रमुख कारण होते हैं. अतः यह बात अत्यंत महत्वपूर्ण है कि इंटरव्यू के दौरान कब मुस्कुराना है तथा कितना मुस्कुराना है.

इंटरव्यू के समय बैठने का ढंग भी बहुत महत्वपूर्ण होता है. ना तो कंधे झुकाकर तथा ना ही अकड़कर बैठना चाहिए. हमेशा सीधा तथा शांत रूप से बैठना चाहिए. चेहरे पर सौम्य और हल्की सी मुस्कान होनी चाहिए.

लाफिंग पर्सनालिटी सभी को पसंद आती है. अनावश्यक रूप से पैरों को नहीं हिलाना चाहिए. इंटरव्यू में सफलता का एक ही मूल मंत्र होता है कि इंटरव्यू का सामना हमेशा अपनी नैसर्गिकता के साथ करें.

अपनी बॉडी लैंग्वेज को दैनिक जीवन में ही इस प्रकार की बना लें कि आपको इंटरव्यू के लिए सचेत होकर नकली आवरण ना ओढना पड़े.

शारीरिक हाव भावों को हमेशा सुधारना चाहिए ताकि हमें इंटरव्यू के लिए इस विषय की अलग से तैयारी नहीं करनी पड़े.

Written By

ramesh sharma

Ramesh Sharma {M Pharm, MSc (Computer Science), MA (History), PGDCA, CHMS}

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